एजुकेशन डेस्क. डर हमारे बेसिक ह्यूमन इंस्टिंक्ट्स में शामिल है और प्रकृति ने इसे हमें खतरों से सचेत करने का काम सौंपा है। हालांकि एक हद के बाद यह डर हमें जिंदगी के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने से रोकने लगता है। न्यू यॉर्क टाइम्स बेस्टसेलिंग ऑथर रूथ सूकअप ने अपनी बुक, डू इट स्केअर्ड के लिए 4000 से अधिक लोगों पर सर्वे कर पाया कि डर के सात रूप होते हैं जिन्हें उन्होंने फीयर आर्किटाइप्स का नाम दिया। उन्होंने पाया कि अधिकांश लोगों में सभी सात आर्किटाइप्स कम-ज्यादा मात्रा में मौजूद होते हैं, लेकिन इनमें से कम से कम एक डॉमिनेंट होता है और हमारी जिंदगी पर साफ तौर पर अपना प्रभाव डालता है। अगर हम अपना फीयर आर्किटाइप जान लें तो उसके नकारात्मक प्रभावों से निपटने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। जानिए क्या होते हैं सातों आर्किटाइप्स के लक्षण और किन हैबिट्स को अपनाकर इन्हें काबू किया जा सकता है।
- द प्रोक्रैस्टिनेटर : ये कोई भी गलती करने या नया काम शुरू करने से डरते हैं। प्रोक्रैस्टिनेटर्स कई बार खुद को कोई फैसला लेने में अक्षम पाते हैं और इसलिए ही रिसर्च व प्लानिंग में काफी समय लगा देते हैं।
- द रूल फॉलोअर : इन्हें अथॉरिटी का डर होता है जो नियमों से हटकर कुछ भी करने से डरने में बदल जाता है। केवल सजा का डर उन्हें आगे बढ़ने रिस्क्स लेने और फैसले लेने से डराता है।
- द पीपल प्लीजर : इन्हें यह डर होता है कि कहीं लोग इनके बारे में गलत धारणा न बना लें। दूसरों के रिएक्शन के बारे में साेचकर ये मना करने या लिमिट्स तय करने से झिझकते हैं।
- द एक्सक्यूज मेकर : जिम्मेदारी लेना इनका सबसे बड़ा डर होता है। किसी काम के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना या दूसरों के सामने गलती उजागर होना इनके लिए एक बुरे सपने के सच होने की तरह है।
- द आउटकास्ट : इनका सबसे बड़ा डर होता है दूसरों पर भरोसा करने का। दूसरों पर विश्वास न करने की यह स्थिति इनके लिए आगे चलकर क्रिमिनल बिहेवियर तक में बदल सकती है।
- द सेल्फ-डाउटर : असुरक्षा की भावना रखने वाले सेल्फ-डाउटर्स, सक्षम न होने के डर से जूझते हैं। इससे ये दूसरों से ईर्ष्या और उनकी आलोचना करते हैं।
- द पैसिमिस्ट : ये अपने काबू से बाहर की परिस्थितियों के शिकार होते हैं और बुरे समय का सामना करने से डरते हैं। इन्होंने अपनी जिंदगी में विपत्तियां झेली होती हैं, इसलिए ये खुद को पीड़ित की भूमिका में देखते हैं।
इन हैबिट्स से पाएं डर पर काबू
केट स्वोबोडा, द करेज हैबिट पुस्तक की लेखिका और टीमसीएलसीसी डॉट कॉम में करेजिअस लिविंग कोच सर्टिफिकेशन की डायरेक्टर हैं। वे इंडिविजुअल्स व टीम्स की डर आधारित हैबिट्स की पहचान कर उन्हें एक अधिक साहसी जिंदगी जीना शुरू करना सिखाती हैं जिसके बारे में वे यहां बता रही हैं-
- कमिटेड बनें : साहसी बनने में कमिटमेंट की भूमिका अहम होती है जो किसी भी फैसले की जड़ में मौजूद वह हैबिट होती है जिसकी मदद से आप अपने सपनों का पीछा कर सकते हैं।
- रुककर विचार करें : ध्यान दें कि कौनसी बातें आपको साहसी बनने से रोकती हैं। अपने डर का सामना करते समय रुकें और विचार करें कि उनके प्रति आपका रेस्पॉन्स क्या होना चाहिए।
- अपने शरीर पर ध्यान दें : अपने शरीर को डर का सामना करना सिखाइए। इसके लिए आप योग, मेडिटेशन, रनिंग, वॉकिंग व वेट लिफ्टिंग जैसी एक्सरसाइजेज की मदद ले सकते हैं।
- बिना अटैचमेंट के अपने विचार सुनें : मन में उठ रहे डरावने ख्यालों को न रोककर उन्हें बिना अटैचमेंट की भावना लाए सुनें। यदि आप इन्हें सच नहीं मानते तो आप इनसे अटैच्ड नहीं होंगे।
- कम्युनिटी की मदद लें : डर व सेल्फ-डाउट अकेलेपन से बढ़ते हैं और लोगों के बीच कम होते हैं। डर के क्षणों में छिपने की इच्छा हो सकती है, लेकिन इसी समय हमें अपने आसपास के लोगों की जरूरत सबसे ज्यादा होती है।